Sunday, 7 February 2021

स्तुति (PRAISE)

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 While worshiping deities Hindus recite Shlokas in praise of the God or the Goddess that are often profusely superlative in nature. Such Shlokas repeatedly remind the deities of whatever good that they (the deities) possess or whatever great deeds they (the deities) had done in the past. Most Hindu deities have hundreds of names, highlighting not only their superhuman qualities but also the supernatural acts of valor, generosity,...
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Thursday, 4 February 2021

यज्ञ

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 हम प्राय: अपनी जानकारी, समझ, अभिव्यक्ति की क्षमता के आधार पर ही किन्हीं चीजों को (जैसे दिये हुये प्रश्न को) समझ पाते हैं और फिर एक बार उपलब्ध जानकारी, समझ, अभिव्याक्ति की क्षमता के आधार पर दिये गए प्रश्न का उत्तर दे पाते हैं| पहला प्रश्न है कि प्रवृत्ति क्या ह...
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Sunday, 4 October 2020

पर्यावरण का अध्यात्म

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 इस ब्रह्माइस ब्रह्माण्ड में जो भी जन्म लेता है वह अपने जीवन का निर्धारित उद्देश्य पूर्ण करने के उपरांत मृत्यु को प्राप्त होता है| मनुष्य को विधाता ने ऐसी क्षमताएँ दी हैं कि वह प्रकृति पर अन्य जीवों और वनस्पतियों की तुलना में अधिक प्रभाव डाल सकता है|   अब देखिये, अभी बहुत समय नहीं बीता जब से मनुष्य ने मात्र अपने ही भौतिक लाभ और सुरक्षा के लिए प्रकृति को ऐसा शत्रु मानना आरम्भ कर दिया, जिस पर विजय प्राप्त करना ही मनुष्य-मात्र की...
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Sunday, 23 August 2020

गणपति उत्सव

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 भगवान गणेश को हर हिन्दू जानता और पूजता है। यह मान्यता है कि किसी भी कामना पूर्ति हेतु ग्रह अथवा देवता की पूजा/अर्चना से पहले  पहले गणेशजी का पूजन आवश्यक है क्यों कि वे ही समस्त संकल्पों की पूर्ति के मार्ग में विघ्नहर्ता माने जाते हैं।   वर्ष 1893 से पहले पूरे भारत देश में और जगहों की तरह महाराष्ट्र में भी गणेश-चतुर्थी का पर्व घरों में मनाया जाता था। राष्ट्रभक्त और महाज्ञानी लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ब्रिटिश राज्य से...
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Sunday, 19 July 2020

जो कुछ भी है; है, अवश्य है।

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न चले, केवल स्थिर रहे तो भी चलती हवायेँ और बरसता पानी किसी के भी अस्तित्व को तब तक घटाता चला जाता है जब तक वह शून्य न हो जाये| किसी भी दिशा में चले तो धरातल का घर्षण और जुड़ जाता है चलती हवाओं और बरसते पानी के साथ अस्तित्व को शून्य बना कर मिटाने के लिये...
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Tuesday, 2 June 2020

स्वदेशी और स्वावलंबन [आत्मनिर्भरता]

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जनकल्याण को ध्यान में रखते हुये यदि वैश्वीकरण का ईमानदार अर्थ लिया जाये तो वह “परस्परावलम्बन” पर आकर टिक जाता है, आत्मनिर्भरता तक तो कभी पहुँच ही नहीं सकता| महात्मा गांधी ने देश की आज़ादी को अंग्रेजों के सत्ता परिवर्तन के रूप में न देख कर खादी और ग्रामोदयोग द्वारा स्वावलंबी भारत के अभ्युदय के रूप में देखा था। आज़ाद भारत में तो हमने 1965 का पाकिस्तान से युद्ध भी देखा, फिर एक 2020 में एक कोरोना संक्रमण देखा| 1965 में श्री लाल बहादुर शास्त्री...
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Monday, 1 June 2020

NOT IMPOSSIBLE

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The entire space of the universe is filled with the TRUTH OF THE EESHWAR (ईश्वर, Almighty) and the illusion (माया) perpetrated by the Almighty. The Truth and the Illusion belong to two entirely different planes, rotating about axes lying in the respective planes and orbiting around infinite god heads into which the Supreme Lord divides Himself without sacrificing His indefiniteness...
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